ब्लॉग छत्तीसगढ़

22 April, 2017

पीडीएफ या वर्ड फाईल को अपने ब्‍लॉग में पब्लिश करना

भाई देव लहरी अपने ब्‍लॉग में पीडीएफ या वर्ड फाईल को पब्लिश करना चाहते हैं। इसे कैसे पब्लिश किया जाय यह पूछ रहे हैं। जो पुराने ब्‍लॉगर हैं उन्‍हें इसकी जानकारी है किन्‍तु नये ब्‍लॉगरों को इसकी जानकारी नहीं हैं इसलिए हम यह जानकारी यहां प्रस्‍तुत कर रहे हैं।
अपने इच्छित पीडीएफ या वर्ड फाईल को https://drive.google.com में अपलोड करें। या उस फाइल को स्‍वयं को ही मेल कर ले यदि आप जी मेल उपयोग करते हैं तो जी मेल उक्‍त फाईल को ड्राईव में सेव करने का विकल्‍प देता है।
गूगल ड्राईव में उस फाईल को क्लिक करके खोलें, उपर दाहिनें कोने के तीन बिन्‍दु को क्लिक करें, एक नया पापप खुलेगा उसमें शेयर (साझा करें) विकल्‍प को क्लिक करें-
पापप में उन्‍नत को क्लिक करें-
चित्र में दिए अनुसार क्लिक करें -
फाईल को पहले विकल्‍प टैब में क्लिक कर सार्वजनिक बनायें फिर सहेज लें -
अब साझा करने के लिए जो लिंक छोटे बक्‍से में नजर आ रहा है उसे कापी कर लें और डेस्‍कटाप में टैक्‍स्‍ट फाईल में टेम्‍परेरी पेस्‍ट कर लें, सम्‍पन्‍न बटन को क्लिक कर दें
अब अपने ब्‍लॉग में आएं, नया पोस्‍ट बनायें या जहां पीडीएफ या वर्ड फाईल को दिखाना चाहते हैं उस पोस्‍ट को एडिट करने खोलें। पोस्‍ट कम्‍पोज के जगह एसटीएमएल मोड में हो। अब यहां नीचे दिए गए कोड़ को कापी करके अपने ब्‍लॉग के उसी जगह पेस्‍ट करें जहां आप यह डाकुमेंट दिखाना चाहते हैं-

डेस्‍कटाप के टैस्‍ट फाईल में टेम्‍परेरी सहेजे आपके डाकूमेंट का लिंक कुछ इस प्रकार से होगा - https://drive.google.com/file/d/0B0uAPPMI9eQ1VEhGUXZyQUtxaEtWN3RkNDI3U0FScmJ3eXBv/view?usp=sharing इसमें से 0B0uAPPMI9eQ1VEhGUXZyQUtxaEtWN3RkNDI3U0FScmJ3eXBv तक का भाग आपके डाकूमेंट का आईडी है। इसे उपर दिए गए कोड के आईडी के उपर पेस्‍ट कर दें। पूर्वालोकन करें और सब ठीक होनें पर पब्लिश करदें। आपका दस्‍तावेज इस प्रकार प्रकाशित होगा - 

14 April, 2017

कोदूराम दलित की साहित्य साधना : अम्‍बेडकर जयंती पर विशेष

मनुष्य भगवान की अद्भुत रचना है, जो कर्म की तलवार और कोशिश की ढाल से, असंभव को संभव कर सकता है । मन और मति के साथ जब उद्यम जुड जाता है तब बडे - बडे तानाशाह को झुका देता है और लंगोटी वाले बापू गाँधी की हिम्मत को देख कर, फिरंगियों कोहिन्दुस्तान छोड कर भागना पडता है । मनुष्य की सबसे बडी पूञ्जी है उसकी आज़ादी,जिसे वह प्राण देकर भी पाना चाहता है, तभी तो तुलसी ने कहा है - ' पराधीन सपनेहुँ सुख नाहीं।' तिलक ने कहा - ' स्वतंत्रता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है और हम उसे लेकर रहेंगे ।' सुभाषचन्द्र बोस ने कहा - ' तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा ।' सम्पूर्ण देश में आन्दोलन हो रहा था, तो भला छ्त्तीसगढ स्थिर कैसे रहता ? छ्त्तीसगढ के भगतसिंह वीर नारायण सिंह को फिरंगियों ने सरेआम फाँसी पर लटका दिया और छ्त्तीसगढ ' इंकलाब ज़िंदाबाद ' के निनाद से भर गया, ऐसे समय में ' वंदे मातरम् ' की अलख जगाने के लिए, कोदूराम 'दलित' जी आए और उनकी छंद - बद्ध रचना को सुनकर जनता मंत्र - मुग्ध हो गई - सम्पूर्ण आलेख शकुंतला शर्मा जी के ब्लॉग शाकुन्तलम् में यहाँ संग्रहित है।

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