ब्लॉग छत्तीसगढ़

27 September, 2007

आदिवासियों पर आधारित एनिमेशन फिल्‍म


मघ्‍य भारत के आदिवासियों की कहानियों पर आधारित पांच एनिमेशन फिल्‍मों का निर्माण ब्रिटेन निवासी तारा डगलस नें किया है जिसका प्रदर्शन पूरे विश्‍व में रोड शो के द्वारा किया जा चुका है एवं सराहा जा चुका है । इस फिल्‍म को नेशनल जियोग्राफिक फिल्‍म फेस्टिवल, नेहरू सेंटर, स्‍कूल आफ ओरियंटल एंड अफ्रिकन स्‍टडीज, द रैडिकल बुक फेयर एडिनबरा और स्‍कार्टलैण्‍ड में दिखाया जा चुका है ।

हिन्दी, अंग्रेजी और हल्‍बी समेत आठ भाषाओं में उपलब्‍ध इन फिल्‍मों को भारत के विभिन्‍न आदिवासी क्षेत्रों में ब्रायन गिनीज चैरिटेबल ट्रस्‍ट द्वारा अपने आदिवासियों के लिए सर्मपित कार्यक्रम द टालेस्‍ट स्‍टोरी काम्‍पीटिशन के तहत उपलब्‍ध कराया गया है । छत्‍तीसगढ में यह आयोजन छत्‍तीसगढ पर्यटन एवं आर्ट होम संस्‍था के सहयोग से 27 सितम्‍बर को राजधानी रायपुर के राजभवन के पीछे स्थित ऐतिहासिक ‘मेसानिक लाज’ में किया गया । पूरे समाचार की जानकारी हमें मिल नहीं पाई है, आज नया रायपुर से भिलाई वाप आते समय हमारे एक मित्र नें इसकी जानकारी दी । घर आकर हमने इस सीमित जानकारी को नेट में खगालना आरंभ किया एवं जितनी जानकारी उपलब्‍ध हो सकी आप लोगों को प्रस्‍तुत कर रहे हैं फिल्‍म की कहानी व अन्‍य जानकारी आवारा बंजारा वाले संजीत त्रिपाठी जी यदि उक्‍त कार्यक्रम में उपस्थित हो पाये हों तो, अपनी टिप्‍पणी के द्वारा देवें तो यह पोस्‍ट पूर्ण हो जायेगा।

पांच फिल्‍मों में से एक ‘हाउ द एलिफेंट लोस्‍ट हिज विंग्‍स’ में छत्‍तीसगढ के बस्‍तर के पारंपरिक व 250 वर्षो से प्रसिद्ध आदिवासी शिल्‍पकला ‘ढोकरा शिल्‍प’ को थ्री डी एनिमेशन से जीवंत रूप में प्रस्‍तुत किया गया है एवं अंचल के पारंपरिक कहानी जिसमें पूर्व में हांथी के पंख हुआ करते थे किन्‍तु हाथी अपने आताताई स्‍वभाव के कारण अपना पंख खो दिया, को मोहक रूप से प्रस्‍तुत किया गया है ।

पांचो फिल्‍म में से ‘हाउ द एलिफेंट लोस्‍ट हिज विंग्‍स’ को पूरे विश्‍व में सराहा गया है जिसकी जानकारी अनेको वेब साईटों में उपलब्‍ध है किन्‍तु यह फिल्‍म मुफ्त में प्रदर्शन के लिए उपलब्‍ध नहीं होने के कारण हम इसे यहां प्रस्‍तुत नहीं कर पा रहे हैं किन्‍तु बस्‍तर के इस पारंपरिक एवं विश्‍व प्रसिद्ध कला के संबंध में नेट में उपलब्‍ध एक फीचर हम यहां जानकारी के लिए प्रस्‍तुत कर रहे हैं देखें बस्‍तर की पारंपरिक कला को जीवंत :

5 comments:

  1. कुछ दिनों पहले डिस्कवरी चैनल में छतीसगढ और बस्तर पर डाक्युमेंटरी देखी थी ।आदिवासी कहानियों को नये स्वरुप में देखना और दिखाना एक नई पहल है । एक सराहनीय प्रयास ।

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  2. Thanks, Sanjeeva

    Yah film Bastar ki janjivan ki kahani hai.

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  3. अब तो ये देखनी पडेगी।

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  4. जाना तो नही हो पाया पर खबर के लिए कोशिश करता हूं!
    शुक्रिया इस जानकारी के लिए!

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  5. सार्थक प्रयास. आभार, इस जानकारी के लिये.

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आपकी टिप्पणियों का स्वागत है. (टिप्पणियों के प्रकाशित होने में कुछ समय लग सकता है.) -संजीव तिवारी, दुर्ग (छ.ग.)

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