ब्लॉग छत्तीसगढ़

24 November, 2007

आज चाँद बहुत उदास है


छटते ही नहीं बादल
किरणों को देते नहीं रास्ता
उमड़ घुमड़ कर
गरज बरस कर
सोख लेते ध्वनि सारी

बजती ही नहीं पायल
स्मृति का देती नहीं वास्ता
सिसक झिझक कर
कसक तड़फ कर
रोक लेती चीख सारी

दिल ही नहीं कायल
खुशबू ऐसी फैली वातायन में
निरख परख कर
बहक महक कर
टोक देती रीत सारी

दिखता ही नहीं काजल
चाँदनी ऐसी बिखरी उपवन में
घूम घूम कर
चूम चूम कर
रो लेती नींद सारी

तुम नहीं हो पास
आज चाँद बहुत उदास है

- अशोक सिंघई -

5 comments:

  1. वाह क्या कहने। अशोक जी और आपको बहुत धन्यवाद इस प्रस्तुति के लिये। आरम्भ की गति कुछ कम हो गई है। उम्मीद है जल्दी ही आपको उसी चिरपरिचित ऊर्जा के साथ देख पायेंगे हम सब।

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  2. सुंदर कविता. वाह! वाह!!

    ReplyDelete
  3. सुंदर!!!

    आरंभ का तो हुलिया ही बदल दिया आपने!!
    बढ़िया लग रहा है!!

    ReplyDelete
  4. सुन्दर लयबद्ध कविता है.

    ReplyDelete
  5. वाह! बहुत सुन्दर लयबद्ध कविता!
    स्वयं शून्य

    ReplyDelete

आपकी टिप्पणियों का स्वागत है. (टिप्पणियों के प्रकाशित होने में कुछ समय लग सकता है.) -संजीव तिवारी, दुर्ग (छ.ग.)

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किरणों को देते नहीं रास्ता
उमड़ घुमड़ कर
गरज बरस कर
सोख लेते ध्वनि सारी

बजती ही नहीं पायल
स्मृति का देती नहीं वास्ता
सिसक झिझक कर
कसक तड़फ कर
रोक लेती चीख सारी

दिल ही नहीं कायल
खुशबू ऐसी फैली वातायन में
निरख परख कर
बहक महक कर
टोक देती रीत सारी

दिखता ही नहीं काजल
चाँदनी ऐसी बिखरी उपवन में
घूम घूम कर
चूम चूम कर
रो लेती नींद सारी

तुम नहीं हो पास
आज चाँद बहुत उदास है

- अशोक सिंघई -
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