ब्लॉग छत्तीसगढ़

25 February, 2008

क्या वट की जड और विदारीकन्द का तिलक किसी को वशीभूत कर सकता है?

9. हमारे विश्वास, आस्थाए और परम्पराए: कितने वैज्ञानिक, कितने अन्ध-विश्वास?

- पंकज अवधिया


प्रस्तावना यहाँ पढे


इस सप्ताह का विषय


क्या वट की जड और विदारीकन्द का तिलक किसी को वशीभूत कर सकता है?


'वशीकरण' शब्द सदा ही से मुझे आकर्षित करता रहा है। कौन नही चाहेगा कि कुछ उपाय अपनाकर मनचाहे व्यक्ति को वश मे कर ले। तंत्र से सम्बन्धित बहुत सी पुस्तको मे मैने यह लिखा पाया कि वट की जड और विदारीकन्द को बराबर मात्रा के पीसकर तिलक के रूप मे इसे माथे पर लगाकर बाहर निकले तो जो देखेगा वही वशीभूत हो जायेगा। कौतूहलवश मैने इसे आजमाया। वट की जड तो आसानी से मिल गयी पर विदारीकन्द के लिये काफी मशक्कत करनी पडी। तिलक का कोई असर नही दिखा। मैने जब ख्यातिलब्ध तांत्रिको से यह चर्चा की तो उन्होने बताया कि सस्ते साहित्य मे आधी-अधूरी जानकारी होती है यदि आपको इन वनस्पतियो का महत्व जानना है तो आप महंगे साहित्य पढे। मैने हजारो रुपये खर्च कर मूल ग्रंथ खरीदे पर फिर भी पूरी जानकारी नही मिली। इन ग्रंथो मे भी बडे-बडे दावे थे पर इनका कोई वैज्ञानिक आधार नही था। तांत्रिक अपनी बात पर अडे रहे पर न तो उन्होने इसे करके दिखाया और न ही असफलता के कारण गिनाये।


बाद मे जब मैने पारम्परिक चिकित्सकीय ज्ञान का दस्तावेजीकरण आरम्भ किया तो पारम्परिक चिकित्सको से मिलने का अवसर प्राप्त हुआ। मैने उनके सामने यह बात रखी तो उन्होने ऐसे पारम्परिक नुस्खो के विषय मे बताया जिनमे वट की जड और विदारीकन्द को मुख्य घटक के रूप मे मिलाया जाता है। इन दोनो वनस्पतियो को मिलाकर भी वे शक्तिवर्धक दवा बनाते है। छत्तीसगढ मे विदारीकन्द को पातालकुम्हडा कहा जाता है। ताकत की दवा के रूप मे यह वनवासियो के बीच लोकप्रिय है। पर इन दोनो का तिलक के रूप मे उपयोग नही होता है और वो भी वशीकरण के लिये। हाँ राज्य के पारम्परिक चिकित्सक अवश्य कहते है कि इन दोनो के आंतरिक प्रयोग से शरीर इतना आकर्षक हो जाता है कि कोई भी आकर्षित हो जाये।


पिछले दस से अधिक वर्षो मे मैने 55 से अधिक पुस्तको मे इस तिलक का वर्णन देखा है। मुझे लगता है कि यदि जमीनी स्तर पर यह सम्भव नही है तो इस तरह के दावे करके अंतोगत्वा तंत्र विज्ञान को ही क्षति पहुँचायी जा रही है। इसी तरह के दावो जैसे एक खुराक से कैसर जड से खत्म, से आयुर्वेद को भी नुकसान पहुँच रहा है। इस लेख के माध्यम से तंत्र विज्ञान के जानकारो से मै अनुरोध करना चाहूंगा कि वे आगे आकर इस तरह के दावो की सत्यता नयी पीढी को बताये। इस पर व्यापक चर्चा हो और झूठे दावो करने वालो को हतोत्साहित किया जा सके।


अगले सप्ताह का विषय़


क्यो कहा जाता है कि जहरीले साँप को देखते ही रुमाल सहित सभी कपडे उस पर डाल देना चाहिये?

4 comments:

  1. वास्तव में चिकित्सकीय ज्ञान को डिस्टिल कर नीम-हकीमों के चंगुल से आजाद कराना जरूरी है।

    ReplyDelete
  2. इस तरह के अंधविश्‍वासों के पनपने और फैलने के कुछ आर्थिक , कुछ सामाजिक कारण भी हैं ,लेकिन अंध परंपराओं के खात्‍में के लिए आपके प्रयासों की तरह कदम उठाने बेहद ज़रूरी है

    ReplyDelete
  3. आप की यह पोंस्ट अंधविश्वासों के विरुद्ध है। लेकिन यह भी दिखा रही हैं कि पुराने लोग कहीं कोडीकृत भाषा में तो उपयोगी सूत्र नहीं छोड़ देते थे। तिलक लगाना कोई कोड रहा हो और संकेत मे यह बताने का प्रयत्न रहा हो कि इन के संयुक्त उपयोग से शरीर आकर्षक हो जाता है?

    ReplyDelete
  4. वट की जड और विदारीकन्द दवा के सन्दर्भ मे अच्छी जानकारी दी है आपने धन्यवाद . रही वशीकरण करने की बात तो यह सब अंधविश्वास है .

    ReplyDelete

आपकी टिप्पणियों का स्वागत है. (टिप्पणियों के प्रकाशित होने में कुछ समय लग सकता है.) -संजीव तिवारी, दुर्ग (छ.ग.)

loading...

Popular Posts