ब्लॉग छत्तीसगढ़

29 December, 2013

पुस्तक चर्चाः तालाबों ने उन्हें हंसना सिखाया


विनोद साव हिंदी गद्य के उन बिरले लेखकों में शामिल हैं जिनमें अपनी लेखन क्षमता को लेकर कोई बहकाव नहीं रहा और प्रयोगधर्मी लेखक के रुप में जिनकी सही पहचान बनी है। व्यंग्य से अपने लेखन की शुरुवात करते हुए हिंदी व्यंग्य के वे सुस्थापित लेखक हुए, फिर उपन्यास, यात्रा वृत्तांत और कहानियां उन्होंने लिखीं। इन सभी जगहों में अपनी विलक्षण प्रवाहमयी खड़ी बोली से हिंदी गद्य में उन्होंने ऐसा वातावरण निर्मित किया जो एक साथ जनवादी और जनप्रिय दोनों हुआ। उनकी रचनाओं में कथ्य की भरपूर उपस्थिति उनके अद्भुत शिल्प और शैली से आलोकित होकर पाठकों में सम्प्रेषण का एक नया वितान बुनती है।

यहां प्रस्तुत संग्रह की कहानियां समाज के उस निम्न मध्य वर्ग की दषा और सोच को सामने लाती हैं जिनके पात्र और चरित्र अलग अलग स्थितियों में अन्यमनस्क और किंकर्त्तव्य-विमूढ़ से खड़े हैं। विशेषकर समाज में हाशिए पर खड़ी स्त्री के मनोविज्ञान की तह तक वे जाते हैं और उनके भीतर की सूक्ष्म अनुभूतियों को वे बखूबी उकेरते हैं। विपरीत परिस्थितियों में भी बरकरार उनके ममत्व की आभा व समर्पण भरे निर्दोष स्त्रीत्व के अनेक आयामों को यहां विनोदजी उद्घघाटित करते हैं और उन्हें उस उंचाई तक ले जाते हैं जिनकी घर समाज में वे हकदार हैं और जिनसे किसी भी घर समाज का जीवन सकारात्मक कर्मो की ओर गतिशील होता है।

उम्मीद है कि यहां प्रस्तुत कहानी संग्रह की कहानियों को पढ़ते हुए पाठक अपने निजी क्षणों मेें कितनी ही बार कहानी की भाषा, कथा और पात्रों की संवेदनाओं को स्पर्श करते हुए एक ऐसी दुनियां की सैर करेंगे जिनमें वे कभी अपनी तो कभी दूसरी दुनियां के वैविध्यपूर्ण जीवंत पलों से वाबस्ता होंगे।

कथा संग्रह: तालाबों ने उन्हें हंसना सिखाया
लेखक: विनोद साव
मूल्य: रु. 250
पृष्ठ संख्या: 120
प्रकाशक: नीरज बुक सेंटर,
सी-32, आर्या नगर सोसायटी, मदरडेयरी
पटपड़गंज, दिल्ली-91 (फोन 011-22722155)


20 सितंबर 1955 को दुर्ग में जन्मे विनोद साव समाजशास्त्र विषय में एम.ए.हैं। वे भिलाई इस्पात संयंत्र में प्रबंधक हैं। मूलत: व्यंग्य लिखने वाले विनोद साव अब उपन्यास, कहानियां और यात्रा वृतांत लिखकर भी चर्चा में हैं। उनकी रचनाएं हंस, पहल, ज्ञानोदय, अक्षरपर्व, वागर्थ और समकालीन भारतीय साहित्य में भी छप रही हैं। उनके दो उपन्यास, चार व्यंग्य संग्रह और संस्मरणों के संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। कहानी संग्रह प्रकाशनाधीन है। उन्हें कई पुरस्कार मिल चुके हैं। वे उपन्यास के लिए डॉ. नामवरसिंह और व्यंग्य के लिए श्रीलाल शुक्ल से भी पुरस्कृत हुए हैं। आरंभ में विनोद जी के आलेखों की सूची यहॉं है।
संपर्क मो. 9407984014, निवास - मुक्तनगर, दुर्ग छत्तीसगढ़ 491001
ई मेल -vinod.sao1955@gmail.com




3 comments:

  1. विनोद भाई क़लम के सिपाही हैं । उनकी साहित्य-साधना अविरल चलती रहे , मेरी यही शुभ-कामना है ।

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    Replies
    1. लेकिन सरकार उन्हें पसंद करती है जो कलम के दरोगा होते हैं.

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आपकी टिप्पणियों का स्वागत है. (टिप्पणियों के प्रकाशित होने में कुछ समय लग सकता है.) -संजीव तिवारी, दुर्ग (छ.ग.)

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