ब्लॉग छत्तीसगढ़

22 December, 2016

सीजी में अमन चैन है

केंद्र सरकार ने बड़े अफसरों को संपत्ति का व्यौरा देने से छूट दे दिया। बिरोधी लोगों को छत्तीसगढ़ में भी आंच जनाने लगा, फटा-फट विज्ञप्ति जारी होने लगे।यह जानते हुए भी कि बड़े अफसर इतने चूतिया नहीं हैं। वे संपत्ति अपने नाम पर नहीं ख़रीदते, अपने दोस्त - रिश्तेदारों के नाम खरीदते हैं। नगदी बिल्डरों के यहाँ खपाते हैं, नोटबंदी के बाद बेकार हुए नोटों से आग तापते हैं और सब कुछ छुपाते हैं।
ये अलग बात है के लुकाने-छुपाने के बावजूद साहेब के घर-आफिस में कोई डायपर पहनाने वाला भी होता है जिसके सहारे पावर गेम को न्यूज मिलते रहता है और तमंचा को भी पता चल जाता है कि फलां प्राधिकरण के बड़े अफसर ने अपनी बहन के नाम से नया रायपुर के आसपास भारी मात्रा में जमीन ख़रीदा है.. या फलां जिले के सूबेदार ने मेटाडोर में पैसा भरकर दिल्ली तरफ भेजा है ब्लाँ.. ब्लाँ।
हमारे जान लेने से साहेब लोगों को कोई फरक नहीं पड़ता, हाँ जे बात तो है भैया, जब से दबंग टाइप मुखिया ने एसीबी का चार्ज सम्हाला है, सबकी फटी हुई है। सभी ने एसीबी से बचे रहने का सुप्पर एंटीवायरस एक्टिव मोड़ में ले लिया है। सिरिफ दो झने का टेंसन है, सीएस और सीएम। क्योंकि ये दोनों रूठे तो अमन (,) चैन से रहने नहीं देंगे।
बहरहाल, अफसर खुश है क्योंकि केंद्र ने उनकी काली कमाई को नजरअंदाज कर दिया है और दोनों टेंसन कैशलेश में बिपतियाये हैं। चैन ही चैन है ... - तमंचा रायपुरी

1 comment:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (24-12-2016) को गांवों की बात कौन करेगा" (चर्चा अंक-2566) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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आपकी टिप्पणियों का स्वागत है. (टिप्पणियों के प्रकाशित होने में कुछ समय लग सकता है.) -संजीव तिवारी, दुर्ग (छ.ग.)

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